ग्राम पंचायत किदा में डबरी निर्माण बना कागज़ी खेल, मस्टर रोल भरे—जमीन पर काम शून्य


 

धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत किदा में मनरेगा के तहत स्वीकृत डबरी निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्ष 2024 में स्वीकृत एक डबरी निर्माण कार्य के लिए कई मस्टर रोल भरे जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि संबंधित हितग्राही का कहना है कि खेत में पानी भरा होने के कारण अब तक निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ।

हितग्राही के अनुसार, “मेरे खेत में पानी होने से काम शुरू नहीं किया गया, फिर भी यदि मस्टर रोल भरे गए हैं तो यह जांच का विषय है।” इधर संबंधित रोजगार सहायक और पंचायत सचिव इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।

वहीं एक अन्य हितग्राही ने बताया कि स्थल चयन नहीं हो पाने के कारण उसके यहाँ डबरी निर्माण शुरू नहीं हो सका है। हालांकि उसके नाम से किसी प्रकार की हाजिरी दर्ज नहीं की गई है। लेकिन इसके डबरी निर्माण कार्य में अबतक 13 मस्टर रोल पर लेबर का हाजरी एंट्री हो चुका है एवं इस हितग्राही ने यह भी कहा कि गाँव में अधिकांश डबरी निर्माण कार्य जेसीबी मशीन से कराया जाता है और जब उसके यहाँ काम शुरू होगा तो वह भी मशीन से ही खुदाई कराएगा।

गौरतलब है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) श्रम-प्रधान योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है। योजना के नियमों के अनुसार अधिकांश कार्यों में मशीनों के उपयोग पर प्रतिबंध है, ताकि अधिक से अधिक स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिल सके। इसके बावजूद यदि जेसीबी जैसी मशीनों से कार्य कराए जाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, तो यह योजना की मूल भावना के विपरीत माना जाएगा।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिना कार्य किए मस्टर रोल भरे गए हैं तो यह वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आ सकता है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। साथ ही, मशीनों के उपयोग की शिकायतों की भी जांच की जानी चाहिए, ताकि योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।

इस संबंध में जब रोजगार सचिव एवं पंचायत सचिव से उनका पक्ष जानने हेतु संपर्क किया गया तो वे अपना पक्ष रखने से इंकार कर दिया। जिससे अनेकों सवालिया निशान पंचायत पर लगना स्वाभाविक है।

Paritosh Mandal

Paritosh Mandal एक अनुभवी ग्रामीण रिपोर्टर हैं, जो गांवों, पंचायतों और स्थानीय विकास से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्टिंग में विशेषज्ञता रखते हैं। वे सटीक, निष्पक्ष और तथ्य-आधारित पत्रकारिता में विश्वास करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का फोकस ग्रामीण जनजीवन, शिक्षा, कृषि और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।

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