ग्राम पंचायत बोजिया में 15वें वित्त की राशि के भुगतान पर उठे सवाल, बिना सील-मुहर और हस्ताक्षर के बिल संलग्न होने का आरोप धरमजयगढ़

 




। जिला पंचायत से स्वीकृत 15वें वित्त आयोग की राशि से संबंधित एक मामला ग्राम पंचायत बोजिया से सामने आया है। यहां भुगतान से जुड़े बिल एवं वाउचर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रस्तुत बिल में सरपंच एवं सचिव के हस्ताक्षर तथा पंचायत की सील-मुहर नहीं होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में भुगतान की प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्राप्त बिल की तस्वीर के अनुसार, बिल बालाजी ट्रेडर्स, नवापारा (छाल), जिला रायगढ़ के नाम से जारी किया गया है। इसमें विभिन्न सामग्रियों की मात्रा, दर और कुल राशि का विवरण दर्ज है। बिल में कुल राशि लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये अंकित दिखाई दे रही है। हालांकि, भुगतान से संबंधित संपूर्ण अभिलेखों की जांच के बिना यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि भुगतान किस प्रक्रिया के तहत और किन दस्तावेजों के आधार पर किया गया।

भुगतान प्रक्रिया की जांच की मांग

मामले को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि यदि संबंधित बिल पर सरपंच एवं सचिव के हस्ताक्षर और पंचायत की सील-मुहर नहीं हैं, तो क्या भुगतान से पहले आवश्यक दस्तावेजों का नियमानुसार सत्यापन किया गया था? क्या संबंधित सामग्री की वास्तविक आपूर्ति हुई और उसका उपयोग पंचायत के स्वीकृत कार्यों में किया गया? इन बिंदुओं की जांच आवश्यक मानी जा रही है।

जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

15वें वित्त आयोग की राशि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में भुगतान से संबंधित दस्तावेजों में किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर उसकी जांच की जानी चाहिए। संबंधित मामले में जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत के अधिकारियों द्वारा भुगतान से जुड़े बिल, वाउचर, स्वीकृति आदेश और अन्य अभिलेखों की जांच किए जाने की आवश्यकता है।

अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को संज्ञान में लेकर जांच करता है या नहीं। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान की प्रक्रिया नियमानुसार हुई है अथवा इसमें किसी प्रकार की अनियमितता बरती गई है।

नोट: इस मामले में ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव तथा संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

Paritosh Mandal

Paritosh Mandal एक अनुभवी ग्रामीण रिपोर्टर हैं, जो गांवों, पंचायतों और स्थानीय विकास से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्टिंग में विशेषज्ञता रखते हैं। वे सटीक, निष्पक्ष और तथ्य-आधारित पत्रकारिता में विश्वास करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का फोकस ग्रामीण जनजीवन, शिक्षा, कृषि और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।

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