धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ जनपद पंचायत के एक ग्राम पंचायत से जुड़ा एक स्थानीय विषय अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुँच चुका है। इस विषय पर भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि आखिर स्थानीय और जिला स्तर पर इस मामले को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया।
02 जनवरी 2026 को केंद्रीय जनशिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से दर्ज की गई शिकायत को भारत सरकार ने गंभीर मानते हुए 19 जनवरी 2026 को छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत राज विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह विषय राज्य शासन के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए इस पर तत्काल जाँच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए तथा की गई कार्रवाई की जानकारी शिकायतकर्ता को सीधे दी जाए।
केंद्र सरकार के इस पत्र के बाद कई अहम सवाल सामने आ रहे हैं। जब मामला धरमजयगढ़ जनपद पंचायत से जुड़ा है, तो क्या जनपद और जिला स्तर के अधिकारियों को इसकी जानकारी पहले से नहीं थी। यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई और यदि जानकारी नहीं थी, तो निगरानी एवं प्रशासनिक नियंत्रण की व्यवस्था आखिर कैसे संचालित हो रही है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि शिकायत पर वास्तविक और ठोस कदम उठाए जाएँ। इससे यह आशंका भी प्रकट हो रही है कि कहीं पहले औपचारिक उत्तर देकर मामले को दबाने का प्रयास तो नहीं किया गया।
अब निगाहें छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत राज विभाग पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि धरमजयगढ़ जनपद पंचायत से जुड़े इस विषय पर निष्पक्ष जाँच होती है या नहीं, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।
