ग्राम पंचायत उदउदा में बिना प्रभार लाखों के आहरण का आरोप

 




वित्तीय गड़बड़ी के साथ जांच प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में

कलेक्टर से निष्पक्ष पुनः जांच की मांग

धरमजयगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत उदउदा से जुड़ा कथित वित्तीय अनियमितता का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों, शिकायत पत्रों, लेखा अभिलेखों और स्मरण पत्रों के आधार पर आरोप है कि वर्ष 2018 से 2021 के बीच पंचायत सचिव द्वारा बिना विधिवत प्रभार के ग्राम पंचायत उदउदा के पंचायत खाते से विभिन्न मदों में लाखों रुपये की राशि का आहरण किया गया। यह मामला अब प्रशासनिक जांच, न्यायालयीन प्रक्रिया और जांच की निष्पक्षता को लेकर भी विवाद का रूप ले चुका है।

प्रकरण के अनुसार 7 अगस्त 2018 से ग्राम पंचायत उदउदा में पंचायत सचिव के अतिरिक्त प्रभार को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में यह बात सामने आई कि संबंधित अवधि में पंचायत सचिव को विधिवत प्रभार नहीं दिया गया था, इसके बावजूद पंचायत की आय-व्यय से जुड़े कार्य, भुगतान और आहरण लगातार किए जाते रहे। इसी अवधि में पंचायत खातों से बड़ी मात्रा में राशि निकाले जाने के रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।

दस्तावेजों में नाली निर्माण, सीसी रोड, गोठान निर्माण, पहुंच मार्ग, रोपण कार्य सहित अन्य विकास कार्यों के नाम पर खर्च दर्शाया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई कार्य या तो मौके पर हुए ही नहीं, या फिर उनकी गुणवत्ता और लागत में भारी अंतर पाया गया। कुछ मामलों में एक ही प्रकार के कार्यों में बार-बार भुगतान अथवा बढ़ी हुई राशि दर्शाए जाने की बात भी सामने आई है।

मामले को लेकर अनुविभागीय अधिकारी, जिला पंचायत तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं। कार्रवाई न होने पर प्रकरण को माननीय न्यायालय तक ले जाया गया। इसके पश्चात प्रशासनिक स्तर पर अतिरिक्त प्रभार हटाने और पदस्थापना में परिवर्तन जैसे निर्णय सामने आए, जिससे शिकायतकर्ता का दावा है कि प्रारंभिक आरोपों की गंभीरता स्वयं प्रशासनिक कार्रवाई से भी परिलक्षित होती है।

इसी बीच प्रशासन द्वारा कराई गई जांच को लेकर भी विवाद उत्पन्न हो गया है। शिकायतकर्ता द्वारा जिला कलेक्टर रायगढ़ को सौंपे गए नवीन स्मरण पत्र में कहा गया है कि जांच प्रक्रिया एकतरफा रही। जांच के दौरान न तो शिकायतकर्ता को सूचना दी गई और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने या दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया गया। जांच रिपोर्ट किन तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर तैयार की गई, इसकी जानकारी भी शिकायतकर्ता को नहीं दी गई, जिससे जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं।

शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि एक ओर प्रभार नहीं मिलने की सूचना दी जाती है, वहीं दूसरी ओर नए पंचायत सचिव को विधिवत प्रभार सौंपे जाने से जुड़े अभिलेख मौजूद हैं। यह विरोधाभास पूरे प्रकरण को और अधिक संदिग्ध बनाता है। उनका आरोप है कि वित्तीय अनियमितताओं जैसे गंभीर विषय में बिना सभी पक्षों को सुने निष्कर्ष निकालना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

अब शिकायतकर्ता ने कलेक्टर रायगढ़ से मांग की है कि पूर्व में की गई जांच को निरस्त करते हुए किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष अधिकारी से पुनः जांच कराई जाए, साथ ही उन्हें समुचित सुनवाई और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि पुनः जांच भी संतोषजनक और निष्पक्ष नहीं होती है, तो वे विवश होकर इस मामले को पुनः माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होगी।

ग्राम पंचायत उदउदा से जुड़ा यह मामला अब केवल कथित वित्तीय गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सीधा सवाल खड़ा करता है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और जनपद पंचायत धरमजयगढ़ की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

Paritosh Mandal

Paritosh Mandal एक अनुभवी ग्रामीण रिपोर्टर हैं, जो गांवों, पंचायतों और स्थानीय विकास से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्टिंग में विशेषज्ञता रखते हैं। वे सटीक, निष्पक्ष और तथ्य-आधारित पत्रकारिता में विश्वास करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का फोकस ग्रामीण जनजीवन, शिक्षा, कृषि और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।

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