आरटीआई में ‘कोई दस्तावेज़ नहीं’ और खाते से निकली रकम—बनहर पंचायत का दोहरा सच
धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत बनहर में वर्ष 2023-24 के दौरान कराए गए सीसी सड़क निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार के तहत आवेदक द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, कार्यस्थल, कुल व्यय, बिल-बाउचर और भुगतान से संबंधित जानकारी मांगी गई थी, लेकिन जनसूचना अधिकारी ने लिखित जवाब में बताया कि इस कार्य से संबंधित किसी भी प्रकार का दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
हैरानी की बात यह है कि इसी कथित दस्तावेज़-विहीन कार्य के लिए सरपंच और पंचायत सचिव के डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) से वेंडर/ठेकेदार को भुगतान किया गया है। यानी जिन अधिकारियों की डिजिटल स्वीकृति के बिना भुगतान संभव नही , उन्हीं के द्वारा कार्य से सम्बंधित कोई जानकारी या दस्तावेज उपलब्ध न होने की बात कही जा रही है !
यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि दस्तावेज़ मौजूद ही नहीं हैं, तो भुगतान किस आधार पर किया गया? और यदि भुगतान हुआ है, तो आरटीआई में दस्तावेज़ न होने की जानकारी क्यों दी गई? क्या यह सूचना अधिकार अधिनियम के तहत भ्रामक सूचना देना नहीं है?
नियमों के अनुसार किसी भी पंचायत कार्य में बिना प्रशासनिक स्वीकृति, बिना माप पुस्तिका और बिना वैध बिल-बाउचर के भुगतान नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद कार्य से सम्बंधित दस्तावेज उपलब्ध न होने की बात कहना न केवल भ्रामक है , बल्कि हास्यस्पद भी है !
अब आवश्यकता इस बात की है कि जनपद पंचायत, जिला पंचायत और संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सीसी सड़क निर्माण वास्तव में हुआ या केवल कागज़ों और डिजिटल हस्ताक्षरों में ही सीमित रहा।
