मानकों को ताक पर रख बना अमृत सरोवर? *सरोवर के नाम पर भ्रष्टाचार की धारा* ?

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धरमजयगढ़ - ग्राम पंचायत पेलमा के झरियापारा में संचालित अमृत सरोवर तालाब गहरीकरण कार्य अब अनियमितताओं को लेकर सवालों के घेरे में है। दस्तावेजों में जहाँ लाखों रुपये की सामग्री उपयोग दर्शाई गई है, वहीं जमीनी स्थिति इस दावे से मेल नहीं खाती दिखाई दे रही है।

उपलब्ध जानकारी और स्थल पर दिख रही स्थिति के आधार पर कार्य अमृत सरोवर के निर्धारित मानकों और स्वीकृत संरचना के अनुरूप नहीं किया गया प्रतीत होता है। मौके पर तटबंध के नाम पर केवल सीमित स्तर पर पत्थर लगाए गए हैं, जबकि अन्य आवश्यक कार्य अपेक्षित रूप में नजर नहीं आते।

विशेष रूप से ईंट और भारी मात्रा में दर्शाया गया बालू (लगभग डेढ़ लाख रुपये) का उपयोग स्थल पर स्पष्ट नहीं है, जिससे सामग्री की वास्तविक खपत पर गंभीर संदेह उत्पन्न हो रहा है। यदि बिल के अनुरूप कार्य किया गया होता, तो निर्माण की गुणवत्ता और स्वरूप अधिक स्पष्ट दिखाई देता।

मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। आवश्यक है कि संबंधित विभाग द्वारा स्थल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि कागजों में दर्शाई गई सामग्री का उपयोग किस प्रकार किया गया।

यदि समय रहते जांच नहीं की गई, तो यह मामला सार्वजनिक धन के उपयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है।

Paritosh Mandal

Paritosh Mandal एक अनुभवी ग्रामीण रिपोर्टर हैं, जो गांवों, पंचायतों और स्थानीय विकास से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्टिंग में विशेषज्ञता रखते हैं। वे सटीक, निष्पक्ष और तथ्य-आधारित पत्रकारिता में विश्वास करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का फोकस ग्रामीण जनजीवन, शिक्षा, कृषि और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।

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