जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली एक ग्राम पंचायत में वित्तीय नियमों की अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार तालाब साफ-सफाई और पचड़ी निर्माण कार्य के नाम पर वेंडरों को 45,150 रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन इस भुगतान से जुड़े बिलों में पंचायत सचिव के अनिवार्य हस्ताक्षर ही नहीं पाए गए।
हैरानी की बात यह है कि इन बिलों पर सरपंच और उप सरपंच के हस्ताक्षर तो मौजूद हैं, लेकिन सचिव, जो कि पंचायत के वित्तीय अभिलेखों का प्रमुख जिम्मेदार होता है, पूरी प्रक्रिया से गायब नजर आ रहा है। नियमों के अनुसार किसी भी वित्तीय भुगतान में सचिव का सत्यापन आवश्यक होता है, ऐसे में उनके हस्ताक्षर के बिना भुगतान किया जाना सीधे तौर पर प्रक्रिया का उल्लंघन माना जा रहा है।
इस पूरे मामले में उप सरपंच की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। सामान्यतः उप सरपंच को वित्तीय मामलों में स्वतंत्र अधिकार प्राप्त नहीं होते, और वह केवल सरपंच की अनुपस्थिति में सीमित दायरे में कार्य कर सकता है। इसके बावजूद बिलों में उनके हस्ताक्षर होना कई शंकाओं को जन्म दे रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या बिना सचिव के सत्यापन के इस प्रकार भुगतान किया जाना वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है, और क्या संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को दरकिनार किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए यह स्पष्ट है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह केवल लापरवाही है या फिर सुनियोजित तरीके से नियमों की अनदेखी कर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया गया है।
